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Adi Maitreya Rudrabhayananda
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शामिल होने की तारीख: 25 जन॰ 2024
बारे में
Sri Adi Maitreya Rudrabhayananda is a visionary mystic, spiritual guide, and the founder of the DVEKA UCSRD (Universal Council for Spiritual Renaissance and Development). Known to many as a bridge between ancient Himalayan wisdom and contemporary consciousness, his work focuses on a singular, profound objective: the unlearning of interference.
पोस्ट (2)
23 फ़र॰ 2026 ∙ 3 मिनट
नक्षत्र और वृक्ष: प्रकृति के साथ भाग्य जोड़ने वाला दिव्य विज्ञान
नक्षत्राणि नमस्यन्ति, सर्वलोकाः सुखप्रदाः। तेषां वृक्षाश्च पूज्यन्ते, शांति-पुष्टि-फलप्रदाः॥ अर्थ: हम उन नक्षत्रों को नमन करते हैं जो समस्त लोकों को सुख प्रदान करते हैं। इन नक्षत्रों से संबंधित विशिष्ट वृक्षों की सेवा और पूजन से मानसिक शांति, स्वास्थ्य की पुष्टि और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्थूल स्वरूप नक्षत्र और वृक्षों के बीच का यह संबंध वैदिक विज्ञान की वह अनूठी धरोहर है, जो सूक्ष्म खगोलीय ऊर्जा को स्थूल जगत से जोड़ती है। हमारे ऋषियों ने यह अनुभव किया था कि...
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21 फ़र॰ 2026 ∙ 3 मिनट
शनि के प्रभाव को समझना: प्रथम, चतुर्थ और अष्टम भाव में शनि की स्थिति
वैदिक ज्योतिष में कुंडली के विशिष्ट भावों में शनि की स्थिति को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कर्मठ और न्याय के स्वामी के रूप में विख्यात शनि का प्रभाव, जिस भाव में वह स्थित होता है और उसकी ग्रहीय शक्ति के आधार पर काफी भिन्न होता है। नीचे शनि के प्रथम, चतुर्थ और अष्टम भावों पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिसमें मूल संस्कृत श्लोक और उनके अंग्रेजी अनुवाद शामिल हैं। 1. प्रथम भाव में शनि (लग्न/असेंट) संस्कृत श्लोक स्थितो विल्ग्ने यदि मंदधर्मी हीनस्तनुः स्यादतिदुःखतप्तः। नीचः...
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